शत शत नमन हे सरहद प्रहरी,कमा.डी.वत्स वीर,
पति ने पायी वीरगति,मेजर कुमुद नहीं हुयी अधीर।
हाथों में नवजात लिये वीरांगना सैनिक वेश चली,
मर्दानी झांसी लक्ष्मीबाई ज्यूं,शत्रु दल से खूब लड़ी।
न थकन न शिकन, हां सूनापन माथा विन कुमकुुुम,
लेकिन फर्ज निभाने को बह न बिलखी और न टूटी।
तुम भी देखो देशहंताओ और फतवा के पैैरोकारो,
अपनो का खून बहाने बालो,भारत माता के गद्दारों।
ओवेसी महबूबा,फारुक देखो,देखो छदम पहरेदारों,
विंदिया पुछ गयी,सिंदूर हटा,पायलिया टूटी,चूड़ी टूटी।
न छूटा धैर्य,न पैर थके,चपल पग सजग शमशान बढ़े,
अहा ! गति की निष्ठुरता,चूूहों ने मां आचंल छेेेद किये।
सच है घाव गम्भीर हुआ ,ना पाक ड़रा, न ढ़ेर हुआ,
बादियों के हसीन लम्हों का दीदार बहुत अधेड़ हुआ।
हे नमो ! तुरंत उपाय करो,नासूर घाव बनता लगता,
सरहद के बाहर से पहिले अदंर का भी इलाज करो।।
काव्य-वेदना
अजय गुप्ता 'अजेय'
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