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पनघट पर मुझे छेड़े

Ajatshatru Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पनघट पर मुझे छेड़े
        
                                                    
                            
कन्हैया नट-नागर ।
कंकड़ काहे मारे
भरल जल गागर ।

भींगे मन मोर
भींगे मोर सारी ।
यशोदा तेरा लला
नहीं अब अनारी ।

ब्रज की यह रीति
अद्भुत न, निराली ।
छेड़े सब सखियां
बोले बारी-बारी ।

मुरली कभी टेरत
कभी हेरत यारी ।
नटखट बहुत तेरा
यशोदा बनवारी ।

श्याम सलोने की
कीर्ति ही निराली ।
हिया मोर चुराए
वृंदावन बिहारी ।
-अजातशत्रु सिंह
 
2 घंटे पहले
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