एक-एक पत्थर को पुल बाँध
जब राम पहुँचे उस पार
तब जामवंत ने एक बात कही
अंगद को भेज राम सही
यह बात सबको मन भाई
अंगद चले सिर झुकायी
भगवान का काम करने को
रावण का कल्याण बताने को
बालिसुत सभा में आये
दशरथनंदन का संदेश लाये
रावण ने इंकार किया
अंगद ने ललकार दिया
जो कोई मेरा पैर हिलाये
हम अपनी सेना पीछे हटाये
कोई भी पाँव हिला न सका
रावण हार मान न सका
अपना शीश उठाने को
रावण पहुँचा पाँव उठाने को
अंगद ने पाँव हटाया
रावण का मुकुट गिराया।
— आदित्य राज