आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

वीर अंगद

                
                                                         
                            एक-एक पत्थर को पुल बाँध
                                                                 
                            
जब राम पहुँचे उस पार
तब जामवंत ने एक बात कही
अंगद को भेज राम सही
यह बात सबको मन भाई
अंगद चले सिर झुकायी

भगवान का काम करने को
रावण का कल्याण बताने को
बालिसुत सभा में आये
दशरथनंदन का संदेश लाये

रावण ने इंकार किया
अंगद ने ललकार दिया
जो कोई मेरा पैर हिलाये
हम अपनी सेना पीछे हटाये

कोई भी पाँव हिला न सका
रावण हार मान न सका
अपना शीश उठाने को
रावण पहुँचा पाँव उठाने को
अंगद ने पाँव हटाया
रावण का मुकुट गिराया।
— आदित्य राज
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर