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अजब सा नशा

ABHISHEK YADAV

Mere Alfaz
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                            अजब सा एक नशा छाता है , जब मै होश मै आता हूँ 
        
                                                    
                            
मै हर पल होश मै रहता हूँ ,मै हर पल बेहोश रहता हूँ 
मै हर पल होश मै रहता हूँ ,मै हर पल बेहोश रहता हूँ 
बहुत बहती है मेरी आंखेंं, और संग बहती स्याही है 
मै तुझको याद नही करता , तू मुझको याद आती है 
मै तेरे लिए कितना तडपता हूँ , और तू बस मुझको सताती है 
मै तुझसे मिलना चाहूँ तो , तू मुझसे दूर जाती है 
जो सुनाना चाहूँ हाल ए दिल तो , तू मुद्दे से मुकर जाए 
जो सुनाना चाहूँ हाल ए दिल तो , तू मुद्दे से मुकर जाए 
जो पूछा एक सवाल तूने था , ये आग उसी ने लगायी है 
ये दर्द तो मेरा है, लेकिन कहती स्याही है 
मै थक भी जाऊ कितना ही , मगर न थकती स्याही है 
बहुत बहती है मेरी आंखेंं, और संग बहती स्याही है 
अजब सा एक नशा छाता है , जब मै होश मै आता हूँ 
मै हर पल होश मै रहता हूँ ,मै हर पल बेहोश रहता हूँ 
मै हर पल होश मै रहता हूँ ,मै हर पल बेहोश रहता हूँ 
बहुत बहती है मेरी आंखेंं, और संग बहती स्याही है 
बहुत बहती है मेरी आंखेंं, और संग बहती स्याही है 
बहुत बहती है मेरी आंखेंं, और संग बहती स्याही है

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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8 वर्ष पहले
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