कोई हमें क्यों याद करे, शायद कभी नहीं
हम ही पागल बने रहे उनसे मिलने को
वो क्या सोचते हैं हमारे बारे में शायद देखो,
हम तो पागल दिल हैं, क्या करें मालूम नहीं।
उसे मिलने को दिल तो सुकून है,
वो लगता है बिना किताब के पन्नों में नहीं
पढ़ता था शायद कितने उपन्यास।
उपन्यास के भेद,
कहानी
याद की बातें !
जब वो मिलते हैं हमसे तो लगता है
सब काम हो गए।
उन्हें मालूम हो कोई खामोश बातें,
हर पैगाम पर यह इश्क़ का ख्याल है!
अपने ही प्यार के हैं...
हमें याद कोई क्यों करे,
हमारे बारे में कौन ही बातें करे,
बीते पल-बीते ख्याल को ज़ख्म की तरह
हम क्यों न भूल जाएँ!
कोई तो
कभी तो,
छोटी बातें ही गुड क्या सोचना...
पता नहीं !
हमें कोई
कोई हमें याद क्यों करे
शायद
कभी नहीं ?