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वक़्त की रफ़्तार

Abhay Gaur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये चंद घड़ियाँ बादल है गर
        
                                                    
                            
बरस गए तो वापस नही आयेंगे
इन लम्हों को सँभाल कर रखो
ये पंछी है गर उड़ गए तो
बसेरा कहीं और लेंगे
अपने अच्छे दिनों को
अपनी जेब मे महफ़ूज़ रखो
गर कट गयी जेब तो ये
किसी और के हो जायेगे
-अभय ‘अवधी’
एक महीने पहले
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