विज्ञापन

ता नहीं हो तमतमाहट

Abdul Hameed

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            छोड़िए अब तिलमिलाहट
        
                                                    
                            
साथ   रखिए   मुस्कुराहट

आ करो फिर से चरागां
ता यहाँ हो जगमगाहट

उसके छूने से मुझे क्यूँ
हो रही है सनसनाहट

बद ज़बानी छोड़ भी दो
ता नहीं हो तमतमाहट

बात कोई जब नहीं है
किसलिए है अनमनाहट
-हमीद कानपुरी
 
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10926 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13147 कविताएं

View Profile

N manglam

391 कविताएं

View Profile