छोड़िए अब तिलमिलाहट
साथ रखिए मुस्कुराहट
आ करो फिर से चरागां
ता यहाँ हो जगमगाहट
उसके छूने से मुझे क्यूँ
हो रही है सनसनाहट
बद ज़बानी छोड़ भी दो
ता नहीं हो तमतमाहट
बात कोई जब नहीं है
किसलिए है अनमनाहट
-हमीद कानपुरी
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