विज्ञापन

जिस जगह पर जनाब रहते हैं

Abdul Hameed

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिनके मुंह पर नक़ाब रहते हैं
        
                                                    
                            
उन के सर ही अज़ाब रहते हैं

मन में उल्झन ज़रा नहीं होती
प्रश्न के जब  जवाब रहते  हैं

मयकदे   रोज़ रोज़ जाते जो
आदमी   बे   रुआब   रहते  हैं

आम जनता वहाँ नहीं जाती
जिस जगह पर जनाब रहते हैं

जो छुआ छूत को बढ़ावा दें
वो  तो खाना ख़राब  रहते  हैं

 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3563 कविताएं

View Profile