जिनके मुंह पर नक़ाब रहते हैं
उन के सर ही अज़ाब रहते हैं
मन में उल्झन ज़रा नहीं होती
प्रश्न के जब जवाब रहते हैं
मयकदे रोज़ रोज़ जाते जो
आदमी बे रुआब रहते हैं
आम जनता वहाँ नहीं जाती
जिस जगह पर जनाब रहते हैं
जो छुआ छूत को बढ़ावा दें
वो तो खाना ख़राब रहते हैं
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