ज़िन्दगी को खिताब दे दीजै
एक उम्दा सा बाब दे दीजै
मयकशों को शराब दे दीजै
मय नज़र की जनाब दे दीजै
बस तमन्ना करी है दीपक की
कब कहा आफ़ताब दे दीजै
जेनज़ीपर चली थीलाठी क्यूँ
ज़ुल्मकाकुछ हिसाब दे दीजै
बस यही चाहता हमीद हुजूर
हाथ में इक किताब दे दीजै
-हमीद कानपुरी