इससे पहले तो यहां कोई...
न रोने वाला था।
ये कैसी हुकूमत आई,
क्या कोई हंसाने वाला न था।
इससे पहले तो....,
मैं तन्हा ही अच्छा था।
तू क्यूं मुझे राह बताने आई,
क्या ये रास्ता मेरी मंजिल तक
जाने वाला न था।
आज जो कुछ भी हूं,
उसी की वजह से हूं।
वरना कौन था हमें रुलाने वाला।
हालात ये है कि...
कोई हमें पूछता तक नहीं,
आगे हाथ बढ़ाये...
कोई देखता तक नहीं।
बस इक मां ही है,
जो हर शहर पूछती है,
बेटा बता..वो कौन है तुझे रूलाने वाला।।
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