जब रोया तो आँख में पानी,
मुझे न मालूम कहते क्या।
प्यार से पोंछ के गले लगाके,
कहती लल्ला तुझे चहिये क्या।
फिर भी न बतायी मुझे कभी,
तू बचपन में क्यों रोता था।
न ही करती खुद की बड़ाई,
कि मेरी ही थाप से सोता था।
ये माँ का प्यार है मान लो तुम,
वरना सब कहते हैं मैंने ये किया।
कितना प्यार दी होगी हमे वो,
मैंने अब तक है उसे क्या दिया।।
माँ के असीम प्यार समुद्री गहराई ----
समर बहादुर यादव बैरागीपुर,
ऐंधा, कुंडा, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश।
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