देश मेरा बढ़ रहा
देश मेरा बढ़ रहा
प्रगति सीढ़ी चढ़ रहा
देश के उत्थान में सब
साथ मिल अब चल रहे हैं
खून से सींचा जिसे था
हर सुमन अब खिल रहे हैं
कंटकों को आज देखो
स्वयं ही वह जल रहा है
देश मेरा बढ़ रहा
गोद में बैठे अभी तक
थे वही अब चल पड़े हैं
जो कभी विघटित मनुज थे
आज वे एकजुट खड़े हैं
झांक देखो हर हृदय अब
एक भाषा पढ़ रहा है
देश मेरा बढ़ रहा
लाल वसुधा दिख रही
अब भी सुनहरे खून से
निर्भय तभी उड़ते यहाँ
नभचर गगन को चूम के
खून के हर एक कण से
वीर प्रतिक्षण पल रहा है
देश मेरा बढ़ रहा
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