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गुज़रती उम्र पर शायरों के अल्फ़ाज़

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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उस ने भूले से क्या नज़र डाली
उम्र सारी ख़राब कर डाली
- अज्ञात


तमाम उम्र सितारे तलाश करता फिरा
पलट के देखा तो महताब मेरे सामने था
- सलीम कौसर

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मेरे रोने का जिस में क़िस्सा है
उम्र का बेहतरीन हिस्सा है
- जोश मलीहाबादी


गो कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तन्हा
लौट कर न देखूँगा चल पड़ा अगर तन्हा
- अनवर शऊर

दिन ख़ुशी के निकाल कर देखे
उम्र का हर बरस उदासी है
- जुनैद अख़्तर


चाहे जितना ख़याल रक्खो मिरा
उम्र मेरी है मुख़्तसर यारो
- ख़ान रिज़वान

मेरी सारी उम्र में
एक ही कमी है तू
- नासिर काज़म


हर निवाला उस का अब तो तल्ख़ है
उम्र नेमत थी मगर जी भर गया
- शाद अज़ीमाबादी

'नूह' को चैन उम्र भर न मिला
क्या हों वो अपने इम्तिहान से ख़ुश
- नूह नारवी


उम्र 'हैरत' दोपहर की धूप थी
शाम अब आई है अब जाते हैं घर
- हैरत फ़र्रुख़ाबादी

6 वर्ष पहले
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