औरों का धन सोना चांदी अपना धन तो प्यार रहा
दिल से जो दिल का होता है वो अपना व्यापार रहा
- गोपालदास नीरज
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आबाद अगर न दिल हो तो बरबाद कीजिए
गुलशन न बन सके तो बयाबाँ बनाइए
- जिगर मुरादाबादी
चला जाता हूँ हँसता खेलता मौज-ए-हवादिस से
अगर आसानियाँ हों ज़िंदगी दुश्वार हो जाए
- असग़र गोंडवी
दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
- निदा फ़ाज़ली