जाने किस ने थप्पड़ मारा काले बादल के चेहरे पर
मैं ने देखा है बादल को ग़ुस्से में बरसा है कितना
~ख़लील रामपुरी
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ये भोग भी एक तपस्या है तुम त्याग के मारे क्या जानो
अपमान रचियता का होगा रचना को अगर ठुकराओगे
~साहिर लुधियानवी
सारी गवाहियाँ तो मेरे हक़ में आ गईं
लेकिन मेरा बयान ही मेरे ख़िलाफ़ था
~नफ़स अम्बालवी
मसनूई बालों का थप्पड़ काफ़ी भारी होता है
उस की ज़ुल्फ़ों ने हिल हिल के रुख़्सारों को मार दिया
~खालिद इरफ़ान