चुनाव प्रचार थमने के बाद और आख़िरी चरण की वोटिंग पूरी होने के बाद पूरे देश की नज़रें इस वक़्त चुनाव-परिणामों पर टिकी हुई हैं। देश के नेताओं ने प्रचार के दौरान विपक्ष पर जमकर हमले किए और जनता से तमाम वादे किए। कई बार ऐसे मौके भी आए जब उन्हें अपनी बात को कहने के लिए काव्य का सहारा लेना पड़ा। यानी कि उन्होंने कविता या शेर के ज़रिए अपनी बात लोगों के सामने रखी। जानें कब-कब थे ऐसे मौके
चुनाव प्रचार के दौरान प्रियंका गांधी ने 'दिनकर' की इस कविता को पढ़ा था
मैत्री की राह बताने को
सबको सुमार्ग पर लाने को
दुर्योधन को समझाने को
भीषण विध्वंस बचाने को
भगवान् हस्तिनापुर आये
पांडव का संदेशा लाये
दो न्याय अगर तो आधा दो
पर, इसमें भी यदि बाधा हो
तो दे दो केवल पाँच ग्राम
रक्खो अपनी धरती तमाम
हम वहीं खुशी से खायेंगे
परिजन पर असि न उठायेंगे
दुर्योधन वह भी दे ना सका
आशीष समाज की ले न सका
उलटे, हरि को बाँधने चला
जो था असाध्य, साधने चला
(जब नाश मनुज पर छाता है
पहले विवेक मर जाता है) - इस पंक्ति को प्रियंका ने पढ़ा था
विज्ञापन
पीएम मोदी ने भी हाल में विरोधियों पर तंज कसा। लेकिन यह तंज शायराना था। पीएम ने कहा कि
न मैं गिरा और न मेरी उम्मीदों के मीनार गिरे,
पर कुछ लोग मुझे गिराने में कई बार गिरे
राहुल गांधी ने बशीर बद्र का शेर पढ़ते हुए सरकार पर निशाना साधा कि
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तिया जलाने में
नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बशीर बद्र की शायरी के माध्यम से अपनी बात कही, शेर था
'दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुँजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जायें तो शर्मिन्दा न हों'
सुषमा स्वराज ने यह शेर पढ़ा।
कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी,
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता
इसके बाद उन्होंने दूसरा शेर पढ़ा
तुम्हें वफ़ा याद नहीं, हमें जफ़ा याद नहीं
ज़िंदगी और मौत के दो ही तो तराने हैं
एक तुम्हें याद नहीं, एक हमें याद नहीं
मनमोहन सिंह ने सुषमा स्वराज की बात का जवाब अल्लामा इक़बाल का यह शेर पढ़कर दिया।
माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
तू मेरा शौक़ देख, मेरा इंतिज़ार देख
अरुण जेटली ने बजट पेश करने के दौरान यह काव्य पढ़ा
कश्ती चलाने वालों ने जब हार के दी पतवार हमें
लहर-लहर तूफ़ान मिले और मौज-मौज मझधार हमें
फिर भी दिखाया है हमने और फिर ये दिखा देंगे सबको
इन हालात में आता है दरिया करना पार हमें
सीताराम येचुरी ने यहां विनय महाजन की कविता को पढ़ा है।
मंदिर-मस्जिद-गिरजाघर ने बाँट लिया भगवान को
धरती बाँटी, सागर बाँटा मत बाँटो इंसान को