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रमज़ान के पाक मौके पर पढ़ें ये 10 बड़े शेर

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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रमज़ान एक पवित्र महीना होता है, चाँद के दीदार के बाद ही इसकी शुरुआत होती है। इन दिनों एक महीने के रोज़े रखे जाते हैं और ईश्वर की इबादत की जाती है। 


इसी का नाम लिए जाएँगे क़यामत तक
हमारे साथ रहेगी अज़ान भी हम भी
- नबील अहमद नबील


'शाहिद' से कह रहे हो कि रोज़े रखा करे
हर माह जिस का गुज़रा है रमज़ान की तरह
-सरफ़राज़ शाहिद

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क़ुबूल हो कि न हो सज्दा ओ सलाम अपना
तुम्हारे बंदे हैं हम बंदगी है काम अपना
- मुबारक अज़ीमाबादी


तू मेरे सज्दों की लाज रख ले शुऊर-ए-सज्दा नहीं है मुझ को
ये सर तिरे आस्ताँ से पहले किसी के आगे झुका नहीं है
- रफ़ीक राज़

आसमान पर जा पहुँचूँ
अल्लाह तेरा नाम लिखूँ
- मोहम्मद अल्वी


अल्लाह के घर देर है अंधेर नहीं है
तू यास के मौसम में भी उम्मीद का फ़न सीख
- अंजुम ख़लीक़

मिरी नमाज़ मिरी बंदगी मिरा ईमाँ
तिरा ख़याल तिरी याद आरज़ू तेरी
- बशीर फ़ारूक़


यही है ज़िंदगी अपनी यही है बंदगी अपनी
कि उन का नाम आया और गर्दन झुक गई अपनी
- माहिर-उल क़ादरी

चांद से रोशन हो रमज़ान तुम्हारा 
इबादत से भरा हो रोज़ा तुम्हारा 
हर दुआ और नमाज़ कबूल हो तुम्हारी 
यही अल्लाह से है दुआ हमारी
- अज्ञात 
7 वर्ष पहले
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