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देशभक्ति से लबरेज ये हैं 20 फिल्मी शेर...

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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                                                  फिल्में हमेशा से संप्रेषण का सशक्त माध्यम रही हैं, नवजवानों का फिल्मों से जुड़ाव गहरा रहा है। ऐसे बहुत से मौके आये जब फिल्मकारों ने देशभक्ति के जज़्बे को बढ़ाने के लिए शायरों-गीतकारों के अल्फ़ाजों का बख़ूबी इस्तेमाल किया है। कारगिल दिवस के अवसर पर पाठकों के लिए पेश है ऐसे ही कुछ चुनिंदा गीतों की पंक्तियां जिन्हे बतौर गीत फिल्मों में शामिल किया गया और ये गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं-  

उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता
जिस मुल्क की सरहद की निगेहबान हैं आँखें
- साहिर लुधियानवी
- फिल्म- आंखें (1968)

दम निकले इस देश की खातिर बस इतना अरमान है
एक बार इस राह में मरना सौ जन्मों के समान है 
 - प्रेम धवन
- शहीद (1948)
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दिल दुश्मन के हिलते हैं

कन्धों से कंधे मिलते हैं, कदमों से कदम मिलते हैं,
हम चलते हैं जब ऐसे तो, दिल दुश्मन के हिलते हैं
-जावेद अख़्तर (2004)

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं
सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं
- शकील बदायूनी       
- लीडर (1964)
 
वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो
पुकारते हैं ये ज़मीन-ओ-आसमां शहीद हो
- राजा मेहंदी अली खां
- फिल्म- शहीद(1948)

आज़ादी की नेमत पाई है

हमने सदियों में ये आज़ादी की नेमत पाई है
सैंकड़ों कुर्बानियाँ देकर ये दौलत पाई है
- शकील बदायूनी       
- लीडर (1964)

ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का
इस देश का यारों क्या कहना, ये देश है दुनिया का गहना
- साहिर लुधियानवी 
- नया दौर (1957)

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में है ।
- बिस्मिल अज़ीमाबादी  
- शहीद (1948)

कातिल कह रहा है बार-बार

यों खड़ा मक़्तल में कातिल कह रहा है बार-बार
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है ।
- बिस्मिल अज़ीमाबादी  
- शहीद (1948)

शहीद तेरी मौत ही तेरे वतन की ज़िंदगी
तेरे लहू से जाग उठेगी इस चमन में ज़िंदगी
- राजा मेहंदी अली खां
- फिल्म- शहीद (1948)

पहरेदार हिमालय के हम, झोंके हैं तूफ़ान के
सुनकर गरज हमारी सीने फट जाते चट्टान के
- गोपालदास "नीरज"
-प्रेम पुजारी (1970)

वक़्त की आवाज़ के हम साथ चलते जाएंगे

वक़्त की आवाज़ के हम साथ चलते जाएंगे
हर क़दम पर ज़िन्दगी का रुख बदलते जाएं
- शकील बदायूनी       
- लीडर (1964)

देकर अपना खून सींचते देश की हम फुलवारी
बंसी से बन्दूक बनाते हम वो प्रेम पुजारी
- गोपालदास "नीरज"
-प्रेम पुजारी (1970)

वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवाँ होगा
रहेगी जब तलक दुनिया, यह अफ़साना बयाँ होगा
-आनंद बक्षी 
-फूल बने अंगारे (1963) 

हम वतन के नौजवाँ हैं

हम वतन के नौजवाँ हैं हम से जो टकरायेगा
वो हमारी ठोकरों से ख़ाक में मिल जायेगा
- शकील बदायूनी       
- लीडर (1964)

हर करम अपना करेंगे ऐ वतन तेरे लिए
दिल दिया है जां भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए
-आनंद बक्षी 
-करमा (1986)

हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई हमवतन हमनाम हैं
जो करे इनको जुदा मज़हब नहीं इल्जाम है
-आनंद बक्षी 
-करमा (1986)

ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत

जिन्दा रहने के मौसम बहुत हैं मगर
जान देने की रुत रोज आती नहीं
-कैफी आज़मी     
-हकीकत (1964)

हुस्न और इश्क दोनों को रुसवा करे
वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं
-कैफी आज़मी     
-हकीकत (1964)

ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।
- बिस्मिल अज़ीमाबादी  
- शहीद  (1948)
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