विज्ञापन

Kargil Vijay Diwas 2022: देशभक्ति के 10 चुनिंदा शेर

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  भारत और पाकिस्तान के बीच मई और जुलाई 1999 में कश्मीर में कारगिल युद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में भारत को जीत हासिल हुई थी। 26 जुलाई को विजय दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर पाठकों के लिए पेश है देशभक्ति से लबरेज शायरों के अल्फ़ाज- 

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त 
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी 
- लाल चन्द फ़लक

ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो 
प्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कान्तिमय हो
- राम प्रसाद बिस्मिल
विज्ञापन

लहू वतन के शहीदों का

लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है 
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी 
-फ़िराक़ गोरखपुरी

वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे 
मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा 
- अज्ञात
 

तीर खाने की हवस है

तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर
सरफ़रोशी की तमन्ना है तो सर पैदा कर
-अमीर मीनाई

जलाने वाले जलाते ही हैं चराग़ आख़िर
ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की
-जमील मज़हर

हम ख़ून की क़िस्तें तो कई दे चुके

हम ख़ून की क़िस्तें तो कई दे चुके लेकिन
ऐ ख़ाक-ए-वतन क़र्ज़ अदा क्यूँ नहीं होता
- वाली आसी

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है
- बिस्मिल अजीमाबादी 

न इंतिज़ार करो इन का ऐ अज़ा-दारो 
शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते 
- साबिर ज़फ़र
 

तेरे शहीद को दूल्हा बना हुआ देखा

तेरे शहीद को दूल्हा बना हुआ देखा
रवाँ जनाज़े के पीछे बरात कितनी है
- बेख़ुद देहलवी

शहादत की ख़ुशी ऐसी है मुश्ताक़-ए-शहादत को
कभी ख़ंजर से मिलता है कभी क़ातिल से मिलता है
- जलील मानिकपूरी
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Parul Bhaktani

1570 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10106 कविताएं

View Profile