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भरे बाज़ार में सच की दुकानों पर है सन्नाटा...

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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                                                  भरे बाज़ार में सच की दुकानों पर है सन्नाटा
तिजारत झूट की चमकी है मक्कारी की बातें हैं
- हिना रिज़्वी

वक़्त के तूफ़ानी सागर में क्रोध कपट के रेले हैं
लेकिन आस के माँझी हर लहज़ा मौजों से खेले हैं
- अफ़ज़ल परवेज़
 
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लोग ऐसे कि सीने की कपट शीशे पे लिख दें
हम ऐसे कि पत्थर को भी पत्थर न कहा जाए
- महशर बदायुनी

मेरी बातें सीधी-सादी मक्कारी से भरे हुए तुम
मेरे पास तो सच्चाई है झूट-कपट से बंधी नहीं हूँ
- गिरिजा व्यास

आसमानों से फ़रिश्ते जो उतारे जाएँ 
वो भी इस दौर में सच बोलें तो मारे जाएँ 
- उम्मीद फ़ाज़ली

झूट बोला है तो क़ाएम भी रहो उस पर 'ज़फ़र' 
आदमी को साहब-ए-किरदार होना चाहिए 
- ज़फ़र इक़बाल

इक आईना कितनी शक्लें देखेगा
मक्कारी के कितने चेहरे निकलेंगे
- तारिक़ क़मर

नींद उड़ने का मज़ा तू भी चखा दे उन को
चाल मक्कार सितारों की उलट कर सो जा
- फ़े सीन एजाज़
 

ये उस का काम है फ़िरक़ा-परस्ती छोड़ दे कैसे
सियासत कुछ भी कर ले उस की मक्कारी नहीं जाती
- मोहम्मद अली साहिल

फैला चुके हैं फ़िरक़ा-परस्ती का ज़हर वो
आए हैं सामने जो अदद इंतिख़ाब के
- इफ़तिख़ार अहमद फख्र
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