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‘झूठ’ पर मशहूर शायरों के 20 चुनिंदा शेर...

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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                                                  सच्चाई और इमानदारी का रास्ता कठिन जरूर होता है लेकिन यही रिश्तों में भरोसा पैदा करता है। मामला चाहे इश्क़ का हो या आपसी रिश्तों का, किसी न किसी रूप में झूठ हर जगह पसरा हुआ है। झूठ से भरोसा टूटता है और लोग परेशान होते हैं, बिखरते हैं, टूट जाते हैं। लेकिन जब कोई रचनाकार/कवि या शायर इस तरह की परिस्थिति को झेलता तो वह अपने जज़्बातों को कविता या शायरी में ढालता है। शेरो-शायरी की श्रृंखला में आज पेश है ‘झूठ’ पर मशहूर शायरों के कुछ शेर- 

सीख रहा हूँ मैं भी अब मीठा झूठ बोलने का हुनर, 
कड़वे सच ने हमसे, ना जाने, कितने अज़ीज़ छीन लिए। 
-अज्ञात 

झूट पर उस के भरोसा कर लिया 
धूप इतनी थी कि साया कर लिया 
- शारिक़ कैफ़ी
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वो झूट बोल रहा था बड़े सलीक़े से 
मैं ए'तिबार न करता तो और क्या करता 
- वसीम बरेलवी

झूट के आगे पीछे दरिया चलते हैं 
सच बोला तो प्यासा मारा जाएगा 
- वसीम बरेलवी

मैं तुम पर हर बार भरोसा करता हूँ
इतना सच्चा झूठ तुम्हारा होता है
- सचिन शालिनी

झूठे चेहरों को सच्चा बताता सदा
रखता इंसाँ सी फ़ितरत अगर आइना
- सचिन शालिनी

झूटा है झूट बात ये बोलेगा आईना
आओ हमारे सामने हम सच बताएँगे
- जुनैद अख़्तर

सच को भी झूट झूट को सच कर दिखाओगे
बस इक अमीर-ए-शहर से याराना चाहिए
- वक़ार फ़ातमी

जा के घर झूटों न पूछी बात तक
बस तिरी झूटी मोहब्बत देख ली
- रिन्द लखनवी

झूट कहने लगा सच से बचने लगा
हौसले मिट गए तजरबा रह गया
- हिलाल फ़रीद

झूट बोला है तो क़ायम भी रहो उस पर 'ज़फ़र'
आदमी को साहब-ए-किरदार होना चाहिए
-ज़फ़र इक़बाल

झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए
और मैं था कि सच बोलता रह गया
-वसीम बरेलवी

जी बहुत चाहता है सच बोलें
क्या करें हौसला नहीं होता
- डाॅ बशीर बद्र 

झूठ से, सच से जिससे भी यारी रख़ें 
आप अपनी तकरीर जारी रख़ें
- राहत इंदौरी 

मैं तुम पर हर बार भरोसा करता हूँ
इतना सच्चा झूठ तुम्हारा होता है
-अज्ञात

मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी
वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा
-परवीन शाकिर

सादिक़ हूँ अपने क़ौल का 'ग़ालिब' ख़ुदा गवाह
कहता हूँ सच कि झूट की आदत नहीं मुझे
-मिर्ज़ा ग़ालिब

तेरे हर झूठ को सच मान लेते हैं हमेशा हम
हमें भी रस्म-ए-उल्फ़त को निभाना ख़ूब आता है
-चाँदनी पांडे

काग़ज़ी कश्ती का रिश्ता ख़ूब है 'आलोक' से
झूठे जितने भी थे वा'दे आप के अच्छे लगे
- आलोक यादव

नज़र आती नहीं मुफ़्लिस की आँखों में तो ख़ुशहाली
कहाँ तुम रात-दिन झूठे उन्हें सपने दिखाते हो
- अज्ञात
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