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होली पर कहे शायरों के रंग भरे शेर

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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सजनी की आँखों में छुप कर जब झाँका
बिन होली खेले ही साजन भीग गया
- मुसव्विर सब्ज़वारी


मुंह पर नक़ाब-ए-ज़र्द हर इक ज़ुल्फ़ पर गुलाल
होली की शाम ही तो सहर है बसंत की
- लाला माधव राम जौहर

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मौसम-ए-होली है दिन आए हैं रंग और राग के
हम से तुम कुछ माँगने आओ बहाने फाग के
- मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी


बादल आए हैं घिर गुलाल के लाल
कुछ किसी का नहीं किसी को ख़याल
- रंगीन सआदत यार ख़ां

मुहय्या सब है अब अस्बाब-ए-होली
उठो यारो भरो रंगों से झोली
- शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम


होली के अब बहाने छिड़का है रंग किस ने
नाम-ए-ख़ुदा तुझ ऊपर इस आन अजब समां है
- शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

वो तमाशा ओ खेल होली का
सब के तन रख़्त-ए-केसरी है याद
- फ़ाएज़ देहलवी


तेरे गालों पे जब गुलाल गुलाल लगा
ये जहां मुझ को लाल लाल लगा
- नासिर अमरोहवी

मिरे दिल में उस ने ऐसे तेरा ख़याल डाला
कोरे लिबास पर हो जैसे गुलाल डाला
- रेनू नय्यर


तमाम आब-ओ-हवा में गुलाल बिखरा है
कि रंग लाया है उस के निखार का मौसम
- राशिद अनवर राशिद

यूं रुख़-ए-ज़र्द चमक उठता है आने पे तिरे
जैसे होली में कोई मल के गुलाल आता है
- चरख़ चिन्योटी

6 महीने पहले
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