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दीपावली 2019: 'उजालों' पर शायराना अल्फ़ाज़...

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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                                                  पहुँच कर शब की सरहद पर उजाला डूब जाता है 
न हो जिस का कोई वो बे-सहारा डूब जाता है 
- ग़यास अंजुम

देखिए तो है उजाला ही उजाला
सोचिए तो तीरगी चारों तरफ़ है
- मासूम अंसारी

फिर उजाला ही उजाला नज़र आता है 'सिराज'
दिल हो बेदार तो दुनिया में कभी शाम नहीं
- सिराज लखनवी
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उजाला ही उजाला रौशनी ही रौशनी है
अँधेरे में जो तेरी आँख मुझ को देखती है
- दानियाल तरीर

चराग़ाँ कर के दिल बहला रहे हो क्या जहाँ वालो
अंधेरा लाख रौशन हो उजाला फिर उजाला है
- अली अहमद जलीली

हम उजाला हैं उजालों से मोहब्बत है हमें
फ़न्न-ए-तख़्लीक़ तिरी शान बदल कर देखें
- रूमाना रूमी

चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है 
अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है 
- फ़रहत एहसास

रौशनी मुझ से गुरेज़ाँ है तो शिकवा भी नहीं 
मेरे ग़म-ख़ाने में कुछ ऐसा अँधेरा भी नहीं 
- इक़बाल अज़ीम

कुछ आरज़ी उजाले बचाए हुए हैं लोग 
मुट्ठी में जुगनुओं को छुपाए हुए हैं लोग 
- अज़हर इनायती

पर्दा-ए-रुख़ क्या उठा हर-सू उजाले हो गए 
सब अँधेरे दामन-ए-शब के हवाले हो गए 
- शारिब मौरान्वी

रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी 
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है 
- वसीम बरेलवी

इन चराग़ों में तेल ही कम था 
क्यूँ गिला फिर हमें हवा से रहे 
- जावेद अख़्तर

शहर के अंधेरे को इक चराग़ काफ़ी है 
सौ चराग़ जलते हैं इक चराग़ जलने से 
- एहतिशाम अख्तर
6 वर्ष पहले
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