पहुँच कर शब की सरहद पर उजाला डूब जाता है
न हो जिस का कोई वो बे-सहारा डूब जाता है
- ग़यास अंजुम
देखिए तो है उजाला ही उजाला
सोचिए तो तीरगी चारों तरफ़ है
- मासूम अंसारी
फिर उजाला ही उजाला नज़र आता है 'सिराज'
दिल हो बेदार तो दुनिया में कभी शाम नहीं
- सिराज लखनवी
विज्ञापन
उजाला ही उजाला रौशनी ही रौशनी है
अँधेरे में जो तेरी आँख मुझ को देखती है
- दानियाल तरीर
चराग़ाँ कर के दिल बहला रहे हो क्या जहाँ वालो
अंधेरा लाख रौशन हो उजाला फिर उजाला है
- अली अहमद जलीली
हम उजाला हैं उजालों से मोहब्बत है हमें
फ़न्न-ए-तख़्लीक़ तिरी शान बदल कर देखें
- रूमाना रूमी
चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है
अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है
- फ़रहत एहसास
रौशनी मुझ से गुरेज़ाँ है तो शिकवा भी नहीं
मेरे ग़म-ख़ाने में कुछ ऐसा अँधेरा भी नहीं
- इक़बाल अज़ीम
कुछ आरज़ी उजाले बचाए हुए हैं लोग
मुट्ठी में जुगनुओं को छुपाए हुए हैं लोग
- अज़हर इनायती
पर्दा-ए-रुख़ क्या उठा हर-सू उजाले हो गए
सब अँधेरे दामन-ए-शब के हवाले हो गए
- शारिब मौरान्वी
रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है
- वसीम बरेलवी
इन चराग़ों में तेल ही कम था
क्यूँ गिला फिर हमें हवा से रहे
- जावेद अख़्तर
शहर के अंधेरे को इक चराग़ काफ़ी है
सौ चराग़ जलते हैं इक चराग़ जलने से
- एहतिशाम अख्तर