कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो
- दुष्यंत कुमार
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बदलती जा रही है दिल की दुनिया
नए दस्तूर होते जा रहे हैं
- शकील बदायुनी
गुज़रने ही न दी वो रात मैं ने
घड़ी पर रख दिया था हाथ मैंने
- शहज़ाद अहमद
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़