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जब बजट की बात हुई है तो पढ़ें शायरों के लिए रुपया-पैसा क्या है

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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संसद में हर साल वित्त मंत्री द्वारा बजट पेश किया जाता है जिसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ता है। बजट यानी आपके पास जितने संसाधन और धन हैं उनके अनुसार ही अपना विकास करना। देश के साथ-साथ लोग अपने पास मौजूद रूपए-पैसों का भी बजट बनाते हैं। इसी रुपए और पैसों पर शायरों का क्या कहना है जाने इन शायरी के साथ 


सिफ़ारिश का भरोसा भी नहीं है
मगर पैसा बराबर बोलता है
- नज़ीर मेरठी


मेहनत से पैसा मिलता है
जैसे को तैसा मिलता है
- ग़ुलाम मुर्तज़ा राही

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सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना

सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना
पैसा सारी उम्र कमाया जा सकता है
- शकील जमाली


पास उस के पैसा बंगले गाड़ियाँ शोहरत भी है
'अश्क' जी वो शख़्स फिर भी ख़ानदानी क्यूँ नहीं
- परवीन कुमार अश्क

हम ये बात बड़े-बूढ़ों से अक्सर सुनते आए हैं

हम ये बात बड़े-बूढ़ों से अक्सर सुनते आए हैं
दाएँ हाथ में खुजली हो तो जेब में पैसा आता है
- वसीम ताशिफ़


घर से जो मेरे सोना या पैसा निकल आता
किस किस से मेरा ख़ून का रिश्ता निकल आता
- अम्बर खरबंदा

चलो माना कि अपनी अहमियत है 'शोख़' दौलत की

चलो माना कि अपनी अहमियत है 'शोख़' दौलत की
ज़माने में मगर हर काम ही पैसा नहीं करता
- परविंदर शोख़


हक़ीक़ी शाइरी दाद-ए-सुख़न से भी हुई महरूम
बिला सर-पैर वाली शाइरी पैसा बनाती है
- साबिर शाह साबिर

ना उन की गुदड़ी में ताँबा पैसा ना मनके मालाएँ

ना उन की गुदड़ी में ताँबा पैसा ना मनके मालाएँ
प्रेम का कासा दर्द की भिक्षा गीत ग़ज़ल दो है कविताएँ
- इब्न-ए-इंशा


लोग उसे भगवान कहेंगे
जिस की जेब में पैसे होंगे
- अनवर मसूद

अतराफ़ हमारे लोगों की इक भीड़ थी जब तक पैसा था

अतराफ़ हमारे लोगों की इक भीड़ थी जब तक पैसा था
ये जेब हुई अब ख़ाली तो सब लोग किनारा करते हैं
- हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी


वैसे पैसा ही सब कुछ है इस दुनिया में
लेकिन पैसे पर भी थूका जा सकता है
- सौरभ शेखर

उधर वो थे कि थी इक दौलत-ए-बेदार पास उन के

उधर वो थे कि थी इक दौलत-ए-बेदार पास उन के
इधर हम थे कि अपनी जेब में पैसा न ढेला था
- हमीद जालंधरी


पास पैसा है नहीं फिर भी जहाँ में मस्त हूँ
ज़िंदगी अपनी किसी फ़नकार की मानिंद है
- अम्बर जोशी

हुआ कैसा असर मासूम ज़ेहनों पर कि बच्चों को

हुआ कैसा असर मासूम ज़ेहनों पर कि बच्चों को
अगर पैसे दिखाओ तो खिलौना छोड़ देते हैं
- अब्बास दाना


लाडले ने ख़त के बदले पैसे भिजवाए मगर
बाप मिलने की तमन्ना दम-ब-दम करता रहा
- सुभाष पाठक ज़िया

मैंने सोचा मुझ से भी कोई प्यार करे

मैंने सोचा मुझ से भी कोई प्यार करे
दिल ने पूछा जेब में तेरी पैसे हैं
- नासिर अमरोहवी

तन का जोगी मन का साइल माँगे मीठी नींद

तन का जोगी मन का साइल माँगे मीठी नींद
रोटी कपड़ा पैसा रख के रोए रात फ़क़ीर
- वहाब दानिश
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