ज़िंदगी, ख़ुशी और ग़म से मिलकर बनी है । एहसासों की गहराईयां सिर्फ फैंटेसी नहीं रचा करतीं बल्कि मोहब्बत के ग़म और जीनव के उन तमाम हालातों को भी रचनात्मक लिबास में हमारे सामने पेश किया करती हैं, जो हम ज़िंदगी के सफ़र में ढेलते हैं। पेश है दर्द-ए-दिल पर 20 बेहतरीन शेर-
एक बेनाम उदासी से भरा बैठा हूं
आज दिल खोल के रोने की ज़रूरत है मुझे।
- अंजुम सलीमी
अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे
बेहिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे।
- शकील बदायुनी
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अभी न छेड़ मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिब
अभी हयात का माहौल ख़ुश-गवार नहीं।
- साहिर लुधियानवी
उदास शाम की यादों भरी सुलगती हवा
हमें फिर आज पुराने दयार ले आई।
- राजेंद्र मनचंदा बानी
इस जुदाई में तुम अंदर से बिखर जाओगे
किसी माज़ूर को देखोगे तो याद आऊंगा।
- वसी शाह
उस ने पूछा था क्या हाल है
और मैं सोचता रह गया।
- अजमल सिराज
न हुआ पर न हुआ मीर का अंदाज़ नसीब,
जौक यारों ने बहुत जोर गजल में मारा।
- ज़ौक़
संभाला होश तो मरने लगे हसीनों पर,
हमें तो मौत ही आयी शबाब के बदले।
- मजाज़
मैं जिया भी दुनिया में और जान भी दे दी,
यह न खुल सका लेकिन, आप की ख़ुशी क्या थी।
- सीमाब अकबराबादी
मिलना था इत्तिफ़ाक़, बिछड़ना नसीब था,
वो इतनी दूर हो गया जितना क़रीब था।
- अज्ञात
ग़म बयां करने का कोई और ढंग ईजाद कर,
तेरी आंखों का यह पानी तो पुराना हो गया।
- वसीम बरेलवी
जिसको बड़ा ग़ुरूर था अपने वजूद पर,
वो आफ़ताब शाम की चौखट पे मर गया।
- शाहिद सागरी
ऐसा भी इत्तिफ़ाक़ मुझे बारहा हुआ,
उनसे मिला हूं उनका पता पूछता हुआ।
- आसी उल्दनी
नक़्शा उठा के और कोई शहर देखिए,
इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गयी।
- निदा फ़ाज़ली
तमतमा रही हैं रात की सियाहियां,
शायद अब हमें कोई चिराग़ मिल सके।
- क़तील शिफ़ाई
न कोई ख्वाब हमारे हैं न ताबीरें हैं,
हम तो पानी पे बनायी हुई तस्वीरें हैं।
- क़तील शिफ़ाई
जिनकी तामीर इश्क़ करता है,
कौन रहता है उन मकानों में।
- फ़िराक़ गोरखपुरी
मजरूह लिख रहे हैं वो अहले-वफ़ा का नाम,
हम भी खड़े हुए हैं गुनहगार की तरह
- महरूह सुल्तानपुरी
वो पलकों पै आ ही गया बन के आंसू,
ज़ुबां पे न हम ला सके जो फ़साना
- हसरत सुहवाई
इस हादसे को सुन के करेगा यक़ीं कोई,
सूरज को एक झोंका हवा का बुझा गया।
- अज्ञात