राधाष्टमी के दिन मथुरा के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र बरसाना में राधा रानी का जन्म हुआ था, इसी उपलक्ष्य में यह दिन मनाया जाता है। राधा के जन्म के उपलक्ष्य में इस दिन को मनाया जाता है। जैसे कृष्ण के लिए बधाईयां गायी जाती हैं, उसी प्रकार राधा के लिए भी बृज में पद गाए जाते हैं।
सूरदास
श्री बृषभानु राइ घर कन्या, प्रगटी त्रिभुवन भागी
जहां तहां जुरे देव मुनि ज्ञानी, परम प्रेम निधि पागी
बाजत शंख नगारे झालरि, सोभा सब ब्रज जागी
चंदन अतर कपूर अरगजा, छिरकत जन अनुरागी
नाना रुचि पकवान बनाये, देत लेत अनमांगी
सूर रसिक कुल कुमद चंद्र यै, प्रगट्यौ परम सुहागी
(सूरदास लिखते हैं कि बृषभानु यानि राधा के पिता के घर कन्या का जन्म हुआ है जिसके भाग्य में तीनों लोक हैं। जिसके लिए जहां-तहां देव, मुनि और ज्ञानी लोग हैं, शंख, नगाड़े बज रहे हैं और पूरा ब्रज ही शोभायमान है। सभी लोग चंदन, इत्र और कपूर छिड़क रहे हैं। नए-नए पकवान बन रहे है और आदान-प्रदान हो रहा है। किसी श्वेत कमल सी राधा अत्यंक ही सुहागवान हैं)
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मोहनी मोहन जू की आई
अद्भुत रूप अनूपम कन्या कीरति रानी जाई
महा मोद मंगल कौ उद्भव प्रगट भयौ सुखदाई
फूले नंद जसोदा गोपी फूले कुंवर कन्हाई
सुर विमान कुसुमावलि बरसत जै-जै धुनि रही छाई
हरदी दूध दही की कादौं गोपी-गोप मचाई
पंच शब्द धुनि बाजे बाजें गान बेनु धुनि लाई
अष्ट सिद्धि नव निधि सुख संपति रमा सहित सिरनाई
धुजा पताका तोरन गृह-गृह मंगल कलश सुहाई
जै श्री हित अलि रूप निरखि मुख सुखमय कुंवरि लई अपनाई
(मोहनी यानी राधा जो कृष्ण की प्रेमिका हैं उनका जन्मोत्सव है। सुंदर रूप वाली अनुपन कन्या मां कीरति के यहां आयी है। यह अत्यंत ही सुखकर दिन है, नंद, यशोदा और स्वयं कृष्ण सभी बहुत प्रसन्न हैं। जयकारों के साथ फूलों की बरसात हो रही है, दूध, दही बंट रहे हैं, गाना-बजाना हो रहा है। जैसे बृषभानु और कीरति के घर पर आठों सिद्धी, नौ निधि के साख स्वयं लक्ष्मी आ गयी हों। हर घर के दरवाज़े पर तोरण लगी है। राधा के रूप को देख कृष्ण का मुख सुखमय हो गया है)
कीरति ने राधा है जाई रसिकन की सरताज री
बजे नगाड़े धूं धंूकारे बाजे बहुतै बाज री
कंचन थार हार मोतिन के चौक पुरावन काज री
गोरी लाली नीली झंगुली और खिलौना साज री
भौंरा की भिर्र और चकई की फिर्र, छूटी आतसबाज री
देस देस के ढांढ़ी ढांढ़न, भांडन जुरी समाज री
भान दान दै धन बरसा किर, दुख दलिद्र भाज री
दधि कांदो महलन में है रह्यो, आनंद को है राज री
फैल रह्यो जस बरसाने कौ सब धामन पै गाज री
जहां बुहारी रमा लगावै, अद्भुत शोभा छाज री
गावो गीत जनम मंगल के, नाचौ तज के लाज री
(कीरति यानी राधा की मां ने रसिकों की रानी को जन्म दिया है। नगाड़े वज रहे हैं, कंचन थाली और मोती के हार के साथ चौक की पूजा की जा रही है जो अक्सर बच्चे के जन्म के बाद किया जाता है। गौर वर्ण राधा ने नीली झंगुली पहनी है और खिलौना हाथ में लिया हुआ है। आतिशबाजी हो रही है, अनेक प्रदेशों से लोग बधाईयां गाने के लिए आए हैं। दरिद्रों के बीट धन बांटा जा रहा है और महल में दही बंट रहा है, चारों तरफ़ आनंद ही आनंद है। बरसाने की यश चारों तरफ़ फ़ैल रहा है और अद्भुत शोभा है। आज इस मंगल उत्सव पर लाज छोड़कर गीत गाने चाहिए)