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आज के शायर: भारत भूषण पंत 

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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                                                  कितना आसान था बचपन में सुलाना हम को 
नींद आ जाती थी परियों की कहानी सुन कर
-भारत भूषण पन्त 
 
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सबब ख़ामोशियों का मैं नहीं था 
मिरे घर में सभी कम बोलते थे 
-भारत भूषण पन्त

एक जैसे लग रहे हैं अब सभी चेहरे मुझे 
होश की ये इंतिहा है या बहुत नश्शे में हूँ 
-भारत भूषण पन्त 

अब तो इतनी बार हम रस्ते में ठोकर खा चुके 
अब तो हम को भी वो पत्थर देख लेना चाहिए 
- भारत भूषण पन्त 
6 वर्ष पहले
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