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ऐसे शेर जिन्हें पढ़कर आपका दिन बन जाएगा...

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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सुबह उठने के साथ ही अगर कोई सकारात्मक बात हम पढ़ लें या सुन लें तो पूरा दिन उर्जा से भरा हुआ गुज़रता है। इसलिए दिन की शुरुआत प्रेरणा से करनी चाहिए। ये शेर ऐसे ही हैं जो आपके दिन को और भी बेहतर बना देंगे। 
 

इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह
ख़ुद बनाता है जहाँ में आदमी अपनी जगह
- अनवर शऊर


इन्हीं ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा
अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है
- अख़्तर शीरानी

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कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं
नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है
- बेदम शाह वारसी


कोशिश भी कर उम्मीद भी रख रास्ता भी चुन
फिर इस के बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर
- निदा फ़ाज़ली

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
- अल्लामा इक़बाल


चले चलिए कि चलना ही दलील-ए-कामरानी है
जो थक कर बैठ जाते हैं वो मंज़िल पा नहीं सकते
- हफ़ीज़ बनारसी

जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा
किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता
- वसीम बरेलवी


देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन जोश-ए-बहार
रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख
- मजरूह सुल्तानपुरी

न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा
- राहत इंदौरी


पैदा वो बात कर कि तुझे रोएँ दूसरे
रोना ख़ुद अपने हाल पे ये ज़ार ज़ार क्या
- अज़ीज़ लखनवी

फ़राग़त से दुनिया में हर दम न बैठो
अगर चाहते हो फ़राग़त ज़ियादा
- अल्ताफ़ हुसैन हाली


बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो
ऐसा कुछ कर के चलो याँ कि बहुत याद रहो
- मीर तक़ी मीर

मंज़िलें न भूलेंगे राह-रौ भटकने से
शौक़ को तअल्लुक़ ही कब है पाँव थकने से
- अदीब सहारनपुरी


ये और बात कि आँधी हमारे बस में नहीं
मगर चराग़ जलाना तो इख़्तियार में है
- अज़हर इनायती

5 वर्ष पहले
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