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आज का शब्द- आद्या और रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’की कविता: तेरा आँचल

रत्नेश मिश्र

Aaj Ka Shabd
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                                                  अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है -आद्या, जिसका अर्थ है- 1. (पुराण) दस महाविद्याओं में से एक 2. पार्वती; दुर्गा; महाकाली; आदिशक्ति; ब्रह्मशक्ति 3. मास की प्रथम तिथि; प्रतिपदा।

1-
विषम पल
जीवन की छाया- सा
तेरा आँचल।

2-
क्रूर है काल
सीधे ग्रहों ने चली
कपट- चाल।

3-
तुम हो आद्या !
तुझे जब सताया
बोलो क्या पाया !
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4-
चली सवारी
साथ न कोई सगा
अंत अकेले।

5- 
जीवन मिला
कुछ ने बोया विष
विष ही खिला।

6- 
प्रलय -पल
पता यह चला कि
सगा न कोई।

7- 
प्राणों के प्यारे
आलिंगन- भय से
हुए किनारे।

8-
सृष्टि रहेगी
क्रूर- कपटकथा
सदा कहेगी।

9- 
प्रतीक्षा करे
काल बैठा देहरी
दर्प न टूटे।

10- 
आएगी भोर
जो बचेंगे, मिलेंगे
फिर खिलेंगे।
5 वर्ष पहले
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