वो चेहरा किताबी रहा सामने
बड़ी ख़ूबसूरत पढ़ाई हुई
बशीर बद्र
देखने के लिए इक चेहरा बहुत होता है
आंख जब तक है तुझे सिर्फ़ तुझे देखूंगा
शहरयार
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कितने चेहरे लगे हैं चेहरों पर
क्या हक़ीक़त है और सियासत क्या
साग़र ख़य्यामी
एक चेहरे में तो मुमकिन नहीं इतने चेहरे
किस से करते जो कोई इश्क़ दोबारा करते
उबैदुल्लाह अलीम
उस एक चेहरे में आबाद थे कई चेहरे
उस एक शख़्स में किस किस को देखता था मैं
सलीम अहमद
तिरे इस फूल से चेहरे ने अब के
मिरे ज़ख़्मों को महकाया बहुत है
अनवर शादानी
देखने के लिए सारा आलम भी कम
चाहने के लिए एक चेहरा बहुत
असअ'द बदायुनी
उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
आसमां पे चांद पूरा था मगर आधा लगा
इफ़्तिख़ार नसीम
अपने चेहरे को बदलना तो बहुत मुश्किल है
दिल बहल जाएगा आईना बदल कर देखो
नसीम निकहत
चेहरे को तेरे देख के ख़ामोश हो गया
ऐसा नहीं सवाल तिरा ला-जवाब था
हयात लखनवी