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माशूक़ा के 'हुस्न' को बयां करते 10 बेहतरीन शेर

अमर शर्मा

Irshaad
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                                                  उफ़ वो मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन 
देखने वाले उसे ताज-महल कहते हैं 

- क़तील शिफ़ाई 
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सुना है उस के बदन की तराश ऐसी है 
कि फूल अपनी क़बाएँ कतर के देखते हैं 

- अहमद फ़राज़ 

अच्छी सूरत भी क्या बुरी शय है 
जिस ने डाली बुरी नज़र डाली 

- आलमगीर ख़ान कैफ़ 

तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं 
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है 

- साहिर लुधियानवी 

इलाही कैसी कैसी सूरतें तू ने बनाई हैं 
कि हर सूरत कलेजे से लगा लेने के क़ाबिल है 

- अकबर इलाहाबादी 

तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है 
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है 

- कैफ़ भोपाली 

फूल गुल शम्स ओ क़मर सारे ही थे 
पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत 

- मीर तक़ी मीर 

तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत 
हम जहाँ में तिरी तस्वीर लिए फिरते हैं 

- इमाम बख़्श नासिख़ 

हसीं तो और हैं लेकिन कोई कहाँ तुझ सा 
जो दिल जलाए बहुत फिर भी दिलरुबा ही लगे 

- बशीर बद्र 

इतने हिजाबों पर तो ये आलम है हुस्न का 
क्या हाल हो जो देख लें पर्दा उठा के हम 

- जिगर मुरादाबादी 
5 वर्ष पहले
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