उफ़ वो मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन
देखने वाले उसे ताज-महल कहते हैं
- क़तील शिफ़ाई
सुना है उस के बदन की तराश ऐसी है
कि फूल अपनी क़बाएँ कतर के देखते हैं
- अहमद फ़राज़
अच्छी सूरत भी क्या बुरी शय है
जिस ने डाली बुरी नज़र डाली
- आलमगीर ख़ान कैफ़
तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है
- साहिर लुधियानवी
इलाही कैसी कैसी सूरतें तू ने बनाई हैं
कि हर सूरत कलेजे से लगा लेने के क़ाबिल है
- अकबर इलाहाबादी
तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है
- कैफ़ भोपाली
फूल गुल शम्स ओ क़मर सारे ही थे
पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत
- मीर तक़ी मीर
तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत
हम जहाँ में तिरी तस्वीर लिए फिरते हैं
- इमाम बख़्श नासिख़
हसीं तो और हैं लेकिन कोई कहाँ तुझ सा
जो दिल जलाए बहुत फिर भी दिलरुबा ही लगे
- बशीर बद्र
इतने हिजाबों पर तो ये आलम है हुस्न का
क्या हाल हो जो देख लें पर्दा उठा के हम
- जिगर मुरादाबादी
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X