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बनी थी कुछ इक उस से मुद्दत के बाद, सो फिर बिगड़ी पहली ही सोहबत[1] के बाद 

काव्य डेस्क

Irshaad
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                            -मीर तक़ी मीर-
        
                                                    
                            

बनी थी कुछ इक उस से मुद्दत के बाद 
सो फिर बिगड़ी पहली ही सोहबत[1] के बाद 

जुदाई के हालात मैं क्या कहूं 
क़यामत थी एक एक साअत[2] के बाद 

लगा आग पानी को दौड़े है तू 
ये गर्मी तेरी इस शरारत के बाद 

कहे को हमारे कब उन ने सुना 
कोई बात मानी सो मिन्नत के बाद 

सुख़न[3] की न तकलीफ़ हम से करो 
लहू टपके है अब शिकायत के बाद 

नज़र 'मीर' ने कैसी हसरत से की 
बहुत रोए हम उस की रुख़्सत के बाद 

1.मिलना जुलना,संगत 2.लम्हा,वक़्त 3.बात, शायरी, शब्द
9 वर्ष पहले
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