विज्ञापन

गांधी की आस्था को उनके मनपसंद भजन से समझिए....

रत्नेश मिश्र

Irshaad
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  वैष्णव जन तो तेने कहिये जे
पीर परायी जाणे रे

पर- दुख्खे उपकार करे तो ये
मन अभिमान ना आणे रे
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ॥
 
विज्ञापन

सकल लोक मा सहुने वंदे
निंदा न करे केनी रे
वाच काछ मन निश्चल राखे
धन- धन जननी तेनी रे
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ॥



सम-दृष्टी ने तृष्णा त्यागी
पर- स्त्री जेने मात रे
जिह्वा थकी असत्य ना बोले
पर- धन नव झाले हाथ रे
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ॥

मोह- माया व्यापे नहीं जेने
दृढ़ वैराग्य जेना मन मा रे
राम नाम शुँ ताली रे लागी
सकल तिरथ तेना तन मा रे
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ॥

वण- लोभी ने कपट- रहित छे
काम- क्रोध निवार्या रे
भणे नरसैय्यों तेनुँ दर्शन कर्ताँ
कुल एकोतेर तारया रे
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ॥
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all