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हम भूखों को सीख सिखाते सपने देखो, धीर धरो : बर्तोल ब्रेख्त

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
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                            खाने की टेबल पर जिनके
        
                                                    
                            
पकवानों की रेलमपेल
वे पाठ पढ़ाते हैं हमको
'संतोष करो, संतोष करो ।'

उनके धंधों की ख़ातिर
हम पेट काट कर टैक्स भरें
और नसीहत सुनते जाएँ
'त्याग करो, भई, त्याग करो ।'

मोटी-मोटी तोन्दों को जो
ठूँस-ठूँस कर भरे हुए
हम भूखों को सीख सिखाते
सपने देखो, धीर धरो 

बेड़ा ग़र्क देश का करके
हमको शिक्षा देते हैं
'तेरे बस की बात नहीं
हम राज करें, तुम राम भजो ।'

साभार : कविताकोश 
8 वर्ष पहले
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