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बल्ली सिंह चीमा: वो फिर चुनाव में वादों के साथ उतरा है...

रत्नेश मिश्र

Irshaad
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                            करो न शोर परिन्दा है डर न जाए कहीं ।
        
                                                    
                            
ज़रा-सा जीव है हाथों में मर न जाए कहीं ।

अगर गुलाब की चाहत है तोड़ ले बढ़ कर,
कहो हयात से काँटों से डर न जाए कहीं ।

वो फिर चुनाव में वादों के साथ उतरा है,
उसे कहो कि वो फिर से मुकर न जाए कहीं ।

मुझे तो सुर्ख़ सवेरों की तरफ़ जाना है,
मेरी हयात अँधेरों से डर न जाए कहीं ।

लगी है आग नगर में औ’बुझ भी जाएगी,
ज़रा हवा से यह कह दो उधर न जाए कहीं ।
7 वर्ष पहले
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