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आग की त्रासदी में झुलसे शायरों के अल्फ़ाज़

दीपाली अग्रवाल

Irshaad
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लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में
- बशीर बद्र


आंसू पोंछ के हंस देता है
आग में आग लगाने वाला
- आरज़ू लखनवी

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आग अपने ही लगा सकते हैं
ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
- मोहम्मद अल्वी


आग लगाई तुम ने ही तो
लोगों ने तो सिर्फ़ हवा दी
- प्रेम भण्डारी

 

जो यहां ख़ुद ही लगा रक्खी है चारों जानिब
एक दिन हम ने इसी आग में जल जाना है
- ज़फ़र इक़बाल


पेड़ का दुख तो कोई पूछने वाला ही न था
अपनी ही आग में जलता हुआ साया देखा
- जमील मलिक

समझ के आग लगाना हमारे घर में तुम
हमारे घर के बराबर तुम्हारा भी घर है
- हफ़ीज़ बनारसी


ये कौन आग लगाने पे है यहां मामूर
ये कौन शहर को मक़्तल बनाने वाला है
- ख़ुर्शीद रब्बानी

आग का क्या है पल दो पल में लगती है
बुझते बुझते एक ज़माना लगता है
- कैफ़ भोपाली


कितनी उजलत में मिटा डाला गया
आग में सब कुछ जला डाला गया
- मनीश शुक्ला

6 वर्ष पहले
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