लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में
- बशीर बद्र
आंसू पोंछ के हंस देता है
आग में आग लगाने वाला
- आरज़ू लखनवी
विज्ञापन
आग अपने ही लगा सकते हैं
ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
- मोहम्मद अल्वी
आग लगाई तुम ने ही तो
लोगों ने तो सिर्फ़ हवा दी
- प्रेम भण्डारी
जो यहां ख़ुद ही लगा रक्खी है चारों जानिब
एक दिन हम ने इसी आग में जल जाना है
- ज़फ़र इक़बाल
पेड़ का दुख तो कोई पूछने वाला ही न था
अपनी ही आग में जलता हुआ साया देखा
- जमील मलिक
समझ के आग लगाना हमारे घर में तुम
हमारे घर के बराबर तुम्हारा भी घर है
- हफ़ीज़ बनारसी
ये कौन आग लगाने पे है यहां मामूर
ये कौन शहर को मक़्तल बनाने वाला है
- ख़ुर्शीद रब्बानी
आग का क्या है पल दो पल में लगती है
बुझते बुझते एक ज़माना लगता है
- कैफ़ भोपाली
कितनी उजलत में मिटा डाला गया
आग में सब कुछ जला डाला गया
- मनीश शुक्ला