लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में
- बशीर बद्र
आंसू पोंछ के हंस देता है
आग में आग लगाने वाला
- आरज़ू लखनवी
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