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काका हाथरसी की हास्य रचना: सीधी नजर हुई तो सीट पर बिठा गए

काव्य डेस्क

Hasya
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                                                  सीधी नजर हुई तो सीट पर बिठा गए
टेढी हुई तो कान पकड़ कर उठा गये।

सुन कर रिजल्ट गिर पडे़ दौरा पड़ा दिल का
डाॅक्टर इलेक्शन का रियेक्शन बता गये ।

अन्दर से हंस रहे है विरोधी की मौत पर
ऊपर से ग्लीसरीन के आंसू बहा गये ।

भूखों के पेट देखकर नेताजी रो पडे़ 
पार्टी में बीस खस्ता कचौड़ी उड़ा गये ।

जब देखा अपने दल में कोई दम नहीं रहा 
मारी छलांग खाई से ''आई'' में आ गये ।
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करते रहो आलोचना देते रहो गाली
मंत्री की कुर्सी मिल गई गंगा नहा गए ।

काका ने पूछा 'साहब ये लेडी कौन है'
थी प्रेमिका मगर उसे सिस्टर बता गए।।

7 महीने पहले
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