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राहत इंदौरी के निधन पर शोक की लहर, सोशल मीडिया पर इन हस्तियों ने किया याद

deepali agrawal

Halchal
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                                                  मशहूर शायर राहत इंदौरी के निधन से सोशल मीडिया में शोक की लहर दौड़ गयी है। अपने पसंदीदा शायर के यूं अचानक चले जाने से सभी अचंभित हैं। राहुल गांधी से लेकर कुमार विश्वास तक सभी ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। 
कुमार ने लिखा है कि, "हे ईश्वर ! बेहद दुखद ! इतनी बेबाक़ ज़िंदगी और ऐसा तरंगित शब्द-सागर इतनी ख़ामोशी से विदा होगा,कभी नहीं सोचा था ! शायरी के मेरे सफ़र और काव्य-जीवन के ठहाकेदार क़िस्सों का एक बेहद ज़िंदादिल हमसफ़र हाथ छुड़ा कर चला गया"

शायर मदन मोहन दानिश ने कहा कि, "राहत साहब एक ऐसे शायर थे जिनकी ज़रूरत जितनी उर्दू मंचों पर थी उतनी ही हिंदी मंचो पर भी। उनकी ही ग़ज़ल का एक शेर जो मशहूर है कि -
वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नईं
वबा-महामारी
लेकिन राहत साहब अपने ही वादे से मुकर गये।
विनम्र श्रद्धांजलि"

 
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राहुल गांधी ने उनका कहा शेर ट्वीट किया है कि, “अब ना मैं हूँ ना बाक़ी हैं ज़माने मेरे, फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे...” अलविदा, राहत इंदौरी साहब।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया कि, "मशहूर शायर राहत इंदौरी साहब के निधन की खबर जानकर बेहद दुख हुआ। आज देश ने एक महान शख़्सियत को खो दिया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें और परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दें।"

ग़ज़ल गायक मोहम्मद हुसैन अहमद हुसैन ने कहा कि, "जाने वाले कभी नहीं आते, जाने वालों की याद आती है। राहत साहब आला शख़्सियत थे जिन्होंने ऐसी शायरी कही कि अपनी छाप छोड़ गए। राहत साहब ने अपने लहजे से हर एक दिल को राहत बख्शी।"

शायर नवाज़ देवबंदी ने कहा कि, "राहत साहब उर्दू-हिंदी मंचों की संयुक्त धरोहर थे। उनके जाने से ग़ज़ल का बहुत नुकसान हुआ है। मुशायरों और कवि सम्मेलनों की दुनिया के शहंशाह थे, वे ऐसे हुनरमंद शायर थे जो पूरे कार्यक्रम को पकड़ कर रखते थे। राहत साहब ने कविता या ग़ज़ल को एक आर्ट बनाया। ग़ज़ल की दुनिया का बादशाह चला गया। 
जनाजे पर मेरे लिख देना यारो,
मोहब्बत करने वाला जा रहा है...
विनम्र श्रद्धांजलि"

नवगीतकार माहेश्वर तिवारी ने कहा कि, "जो महसूस करते थे उसे अभिव्यक्ति देते थे। यह एक व्यक्ति और शायर की ईमानदारी मानी जाती है और इस मामले में मैं राहत साहब की बहुत कद्र करता हूं। बिलकुल साफ बोलने वाले थे।एक घटना मुझे याद है- इंदौर के कवि सम्मेलन में एक बार नइम साहब मंच पहली बार ग़ज़ल पढ़ रहे थे , ग़ज़ल की तकनीक के लिहाज़ से कहीं कुछ कमी थी तो उस पर राहत साहब ने ऐतराज किया, जबकि नइम साहब भी बड़ी शख़्सियत थे। नइम साहब ने कन्विंस किया फिर राहत साहब मान भी गये। गलती पर नाक-भौं सिकोड़ने वाले तो बहुत मिल जाएंगे लेकिन सच के साथ टिके रहना बहुत कम लोगों में होता है, राहत साहब में ये बात थी। लंबे समय तक उनके साथ रहा। उनका अचानक यूं चले जाना पीड़ादायी है।"

गीतकार जावेद अख़्तर ने लिखा कि, "राहत साहब के जाने से उर्दू अदब और समाज को अपूरणीय क्षति पहुंची है। वह हबीब जालिब के समान ही साहसी शायर थे।"
 

अभिनेता फ़रहान अख़्तर ने परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

शबाना आज़मी, अदनान सामी, जावेद जाफ़री आदि ने भी शोक प्रकट किया। 
6 वर्ष पहले
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