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हाइकु: बैठे हैं यूँ ही, प्यार हुआ जब- कुँवर दिनेश...

रत्नेश मिश्र

Haiku
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                                                  प्रेम में राधा
भावना के बल से –
कृष्ण को बाँधा ।

प्यार में डूबा
आनन्द भी ,पीड़ा भी
मन अजूबा ।

तुम जो मिले
जीवन में फाल्गुन,
सुमन खिले ।
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हाथों में हाथ
जिजीविषा बढ़ाता
तुम्हारा साथ ।

बाहों में तुम
सारे संशय-भ्रम
हो गये गुम ।

छुपाऊँ कैसे
एहसास प्यार का
बताऊँ कैसे ।

मिलते कहीं
शहर है छोटा - सा
जगह नहीं ।

दर्द का रिश्ता
दिल ढूँढ़े जिसको
आये फ़रिश्ता ।

कशमकश
स्मृतियों में छलके
भावकलश ।

बोलते नैन
हम दोनों की चुप्पी
तोड़ते नैन ।

तन है कहीं
प्यार में पगलाया
मन है कहीं ।

प्रेम की माया
साथ रहते नहीं
मानस- काया ।

मन उचाट
आँखों -आँखों में अब
रात को काट ।

लग जा गले
फिर कोई भी भ्रान्ति
जी को न छले ।

चुप्प न रहो
प्रेम का नियम है-
कुछ तो कहो ।

कुछ भी बोलो
प्रेम का नियम है
मन से बोलो ।

दिल की कही
लगे बिल्कुल सही
प्यार है यही ।

जन्मों का नाता
दूर-दूर दिलों को
पास ले आता ।

बैठे हैं यूँ ही,
प्यार हुआ जब से,
ऐंठें हैं यूँ ही

लगती पूरी
गागर ये प्रेम की
फिर अधूरी ।
7 वर्ष पहले
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