पीयूष दईया की कविताएं कुछ तलाशती हुई नए-नए किवाड़ खोलती सी प्रतीत होती हैं। इसके लिए वह कई प्रतीकों और बिंबों का इस्तेमाल करते हुए नए मुहावरे गढ़ते हैं। इन अशीर्षक कविताओं को उन्होंने नौ श्रेणियों में बांधकर प्रस्तुत किया है। हर श्रेणी की कविता के साथ रेखाचित्र का प्रयोग कविताओं को और अधिक सार्थक और बोधगम्य बना देता है। ऐसे प्रयोग बहुधा कम ही देखने को मिलते हैं। आम पाठक के लिहाज से पीयूष दईया की भाषा थोड़ी दुरूह जरूर लगती है, लेकिन उसमें उन्होंने जिस तरह बिंबों को बांधा है, उससे कविताओं की पठनीयता उत्सुकता सी जगाती हुई और आगे की तलाश कराती है। कविताओं की लाइब्रेरी में उनकी एक लाइन की कविता भी बड़ा कैनवास लिए है।
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‘क्षमा व्योम की दिवंगत लौ है’ के जरिए वह बहुत कुछ कहते हुए पाठक के अंतस को झकझोरते हैं। कविता मर रही संवेदनाओं और अहम को आईना दिखाती सी लगती है। पीयूष दईया ने अपनी बात को कहने के लिए किसी भी कविता में कोई बड़ा शब्दजाल नहीं बुना, बल्कि कम शब्दों में पूरी पटकथा खींची है। त (लाश) वर्ग की नौवीं कविता में वह केवल ग्यारह शब्दों में ही भीतर के खोखलेपन को उजागर कर देते हैं।
एक कविता में वह केवल दस शब्दों में नए तरीके से तलाश के साथ होते खिलवाड़ को अभिव्यक्त करते हैं। कविताओं में अनुभव के शब्द, विरह, वेदना का दर्द, कल्पनाशीलता की उड़ान और जमीनी हकीकत जहां-तहां दिखती है।
विषयों को पकड़ने और उन्हें कम शब्दों में रखने की कला भी उनकी हर कविता में दिखती है। वह शिल्प की नई प्रयोगशाला में शब्दों को ढालते हुए पाठकों तक पहुंचाते हैं। सफेद पांडुलिपि में वह स्वयं से कई सवाल पूछते दिखते हैं, तो कुछ कविताओं में उलटबांसियों से रूबरू कराते हैं। उन्होंने अपनी कविताओं में भाषा संयोजन का नवप्रयोग किया है। इससे कविताओं में मैदान-सा विस्तार, समुद्र सी गहराई और पहाड़-सी ऊंचाई नजर आती है। 79 कविताओं का यह संग्रह नवाचार के साथ सामने आया है।
यह एक खास बौद्धिक वर्ग की ज्ञानक्षुधा को संतुष्ट करने वाला है। कविताएं भले ही छोटी हैं, लेकिन अपनी गूढ़ता से वह पाठकों पर गहरा असर छोड़ने वाली हैं। राजकमल जैसे ख्यात प्रकाशन से प्रकाशित संग्रह में त्रुटि की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए थी। बावजूद इसके कुछ कविताओं में शब्दों का टूटना अखरता है। कुल मिलाकर संग्रह त(लाश) की कविताएं जीवन के कई आयामों को तलाश करती हुई आगे बढ़ती हैं।
किताब- त(लाश)
लेखक- पीयूष दईया
प्रकाशक- राजकमल प्रकाशन प्रा. लि., नई दिल्ली
मूल्य- 295 रुपये