Guru Margi 2025: देवगुरु बृहस्पति अब वक्री से मार्गी हो गए हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का वक्री होने से मतलब उल्टी चाल और मार्गी होने का अर्थ सीधी चाल से होता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को शुभ ग्रह माना जाता है। यह बुद्धि, ज्ञान, भाग्य, संतान सुख, विवाह और जीव के कारक ग्रह होते हैं। देवगुरु वृहस्पति को धनु और मीन राशि का स्वामी माना जाता है। यह कर्क राशि में उच्च के होते हैं। जब भी किसी जातक की कुंडली में देवगुरु शुभ भाव में रहते हैं या फिर द्दष्टि डालते हैं तो उस व्यक्ति के जीवन में हमेशा सुख और समृद्धि आती है और भाग्य का अच्छा साथ मिलता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक देवगुरु बहस्पति बीते 4 फरवरी 2025 को वृषभ राशि में वक्री से मार्गी हुए हैं। आपको बता दें यह 15 मई 2025 तक वृषभ राशि में मार्गी रहेंगे फिर मिथुन राशि में गोचर होंगे। इसके पहले गुरु 09 अक्तूबर 2024 को वृषभ राशि में वक्री हुए थे। गुरु के मार्गी होने से इसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों पर देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं गुरु के मार्गी होन से मेष राशि के जातकों पर किस तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
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