कुंडली में कई तरह के शुभ योगों का निर्माण होता है और इन्ही शुभ योगों में एक धन योग भी होता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में धन योग का निर्माण होता है तो वह अपने जीवन में बहुत सारा धन अर्जित करने में कामयाब रहता है। ऐसे जातकों की आर्थिक स्थिति हमेशा अच्छी रहती है। कुंडली में धन योग बनने से जातक समृद्धिशाली, खुशहाल, धनवान और सभी तरह के सुखों को आनंद उठाने वाला होता है। आइए जानते हैं कुंडली में धन योग कब, कैसे बनता है और इसके क्या-क्या फायदे होते हैं।
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क्या होता है धन योग
धन योग जैसे कि इसके नाम से स्पष्ट होता है कि कुंडली में यह योग बनने पर व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन की कोई कमी महसूस नही होती है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली का दूसरा और कुंडली का ग्यारहवां भाव धन का माना जाता है। ऐसे में किसी जातक की कुंडली में इसके पहले, पांचवें और नौवें भाव के स्वामी का संबंध दूसरे और ग्यारहवें भाव से हो तो धन योग का निर्माण होता है। वहीं दूसरी तरफ जब एकादश भाव का स्वामी धन भाव में हो या फिर धन भाव का स्वामी लाभ में हो तो धन योग का निर्माण होता है। इसके अलावा सभी ग्रहों में देवगुरु बृहस्पति और दैत्यों के गुरु शुक्र भी धन कारक होते हैं और यह सभी तरह के भौतिक सुखों और लाभ प्रदान करने में सहायक होता है।
कुंडली में धन योग का प्रभाव
- जब किसी जातक की कुंडली में लग्न का स्वामी दशम भाव में हो तो जातक अपने माता-पिता से ज्यादा धनवान होता है।
- जब जातक की कुंडली के सप्तम भाव में मंगल, शनि और एकादश भाव में केतु को छोड़कर कोई दूसरा ग्रह हो व्यक्ति बिजनेस करता है और उसमें अच्छा-खासा धन कमाता है।
- जब दूसरे भाव का स्वामी आठवें धर में हो तो जातक अपनी मेहनत और संघर्षों के बल पर धनवान और समृद्धिशाली होता है।
- कुंडली के छठे, आठवें और बारहवें भाव का स्वामी इन्ही भावों में हो तो जातक को जीवन में अचानक धन हासिल करता है।
- कुंडली के दशम भाव का स्वामी वृषभ, तुला या शुक्र आ जाए तो व्यक्ति अपने जीवन साथी से धनवान बनता है।
- कुंडली के किसी एक भाव में जब गुरु, बुध और शुक्र तीनों एक साथ हो तो जातक अच्छा खासा धन कमाता है।
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