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गिर कर चलना सीख लिया है

                
                                                         
                            हर पल चलते, हर दिन जलते,
                                                                 
                            
रुकते थकते, फिर से चलते ।
हर एक धूप तपन ने भी अब,
शाम को ढलना सीख लिया है ।
गिर कर चलना सीख लिया है ॥

मेहनत की एक अंतिम कश थी,
लहरों में कश्ती बेबस थी ।
विकट समंदर की लहरों से,
मन ने लड़ना सीख लिया है ।
गिर कर चलना सीख लिया है ॥

जीत की जिद थी, मन था उत्सुक,
हर पल बस मेहनत का कौतुक ।
मिली हार की घोर निराशा,
समय व्यर्थ करने में क्या तुक ।
स्वाद जीत का, सबक हार का,
अदब जीत का, सबब हार का ।
हार-जीत के अंतर से अब,
जीवन पढ़ना सीख लिया है ।
गिर कर चलना सीख लिया है ॥
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5 महीने पहले

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