आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Ramdhari Singh Dinkar:  सत्ता की महत्ता को चुनौती देने वाले कवि

                
                                                         
                            एक मनुज संचित करता है अर्थ पाप के बल से
                                                                 
                            
और भोगता उसे दूसरा भाग्यवाद के छल से।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता में ओज का स्वर ललकार में तब्दील होता है लेकिन उसमें विचार की सम्पदा है, वे श्रम के महत्व को स्वीकार करते हैं भाग्यवाद को तोड़ने की बात करते हैं।

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से 

https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o  

एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर